भारत में अचानक क्यों बढ़ रहा है मोरिंगा का ट्रेंड?
नई दिल्ली: अगर आप पिछले एक साल में हेल्थ स्टोर्स, ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप्स या आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स पर नज़र डालें, तो एक नाम बार-बार दिखेगा — मोरिंगा। कभी इसे गरीबों की सब्ज़ी कहा जाता था, आज वही मोरिंगा मिडिल क्लास से लेकर फिटनेस इंडस्ट्री तक का नया फोकस बन चुका है।
सवाल यह नहीं है कि मोरिंगा फायदेमंद है या नहीं। असली सवाल यह है — भारत में अचानक इसका ट्रेंड क्यों बढ़ा? क्या यह सिर्फ मार्केटिंग है या इसके पीछे वाकई कोई ठोस वजह है?
सिर्फ सुपरफूड नहीं, एक सिस्टम का हिस्सा
2024 के बाद भारत में हेल्थ को लेकर लोगों की सोच बदली है। COVID के बाद से इम्युनिटी, लोकल फूड और प्लांट-बेस्ड न्यूट्रिशन पर फोकस बढ़ा। इसी दौर में मोरिंगा को लेकर WHO और कई न्यूट्रिशन स्टडीज़ का ज़िक्र सामने आया।
WHO पहले ही मोरिंगा को “Future Nutrition Crop” की श्रेणी में रख चुका है, खासकर विकासशील देशों के लिए।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
दिल्ली के सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. आर.के. वर्मा के अनुसार, मोरिंगा इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह:
- मल्टी-विटामिन सप्लीमेंट जैसा काम करता है
- लंबे समय तक लेने पर साइड इफेक्ट कम हैं
- डायबिटीज और थकान जैसे लाइफस्टाइल प्रॉब्लम्स में सपोर्ट करता है
हालांकि डॉक्टर यह भी चेतावनी देते हैं कि मोरिंगा कोई “चमत्कारी दवा” नहीं, बल्कि एक सपोर्टिंग न्यूट्रिशन है।
किसानों के लिए नया मौका
मोरिंगा सिर्फ शहरी हेल्थ ट्रेंड नहीं है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई इलाकों में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ मोरिंगा की खेती जोड़ रहे हैं।
कम पानी, कम देखभाल और साल भर डिमांड — यही वजह है कि मोरिंगा को “Low Risk Crop” कहा जा रहा है।
2026 तक क्या बदलेगा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 तक मोरिंगा सिर्फ पाउडर या कैप्सूल तक सीमित नहीं रहेगा। इससे जुड़े:
- रेडी-टू-ड्रिंक हेल्थ ड्रिंक्स
- सरकारी न्यूट्रिशन प्रोग्राम
- रूरल स्टार्टअप्स
इन सबमें मोरिंगा की भूमिका और बढ़ेगी।
ट्रेंड नहीं, ट्रांज़िशन
मोरिंगा को सिर्फ “नया सुपरफूड ट्रेंड” समझना बड़ी भूल होगी। यह भारत के बदलते हेल्थ बिहेवियर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोकल न्यूट्रिशन की वापसी का संकेत है।